उत्तर प्रदेश में लखनऊ स्थित केयर लीवर्स की शैक्षणिक स्थिति
परिचय: “केयर लीवर्स” वे युवा हैं जो सरकारी या गैर-सरकारी बाल देखभाल संस्थानों (बाल गृह, बाल आश्रम आदि) से 18 वर्ष की आयु के बाद निकलकर स्वतंत्र जीवन की ओर बढ़ते हैं। बचपन में इन्हें आश्रय, शिक्षा और अन्य सुविधाएँ दी जाती हैं, लेकिन संस्थान छोड़ने के बाद उन्हें जीवन-यापन के साधनों के साथ-साथ शिक्षा के अवसर भी अपनी क्षमता से आगे हासिल करने होते हैं। बाल न्याय (देखभाल एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 के तहत 18 वर्ष के बाद भी ये युवा 21 वर्ष तक (विशेष परिस्थितियों में 23 वर्ष तक) “आफ्टरकेयर” सेवाओं के अधिकारी माने जाते हैं। हालांकि संविधान और नीतिगत प्रावधान होने के बावजूद इनके सामने अनेक चुनौतियाँ हैं।
विद्यालय, कॉलेज एवं व्यावसायिक शिक्षा में पहुंच और भागीदारी
केयर लीवर्स को आश्रय संस्थानों में रहने के दौरान आमतौर पर प्राथमिक से लेकर माध्यमिक स्तर की शिक्षा मिलती है। अधिकांश बाल गृह इनकी पढ़ाई 10वीं या 12वीं तक सीमित कर देते हैं। औपचारिक रूप से केयर लीवर्स को अध्ययन के लिए सब्सिडी, छात्रवृत्ति तथा व्यावसायिक प्रशिक्षण तक पहुंच का वादा है, लेकिन व्यवहार में काफ़ी कम ही आगे बढ़ पाते हैं। उदाहरण के लिए, बाल संरक्षण गृहों में नियमों के अनुसार बच्चों को उनकी उम्र के अनुसार शिक्षा दी जाती है और व्यावसायिक प्रशिक्षण के भी अवसर प्रदान किए जाते हैं। राज्य मिशन वात्सल्य (दिल्ली, 2022) के दिशानिर्देश भी बताती हैं कि बाल गृह में आश्रितों को आयु के अनुरूप शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण उपलब्ध कराए जाएं। फिर भी संस्थान छोड़ने पर इनके सामने वास्तविक कठिनाइयाँ आती हैं।
लखनऊ के लड़कों (Boys) के आफ्टरकेयर होम में केयर लीवर्स की शैक्षणिक स्थिति : एक जमीनी अध्ययन
लखनऊ स्थित एक आफ्टरकेयर होम में किए गए मैदान-स्तरीय (field-based) अध्ययन के दौरान कुल 52 केयर लीवर्स से व्यक्तिगत रूप से बातचीत की गई। यह संपूर्ण डेटा प्रत्यक्ष संवाद (in-person interaction) पर आधारित है, जो केयर लीवर्स की वास्तविक शैक्षणिक स्थिति और उनके सामने मौजूद चुनौतियों को उजागर करता है।
1. केयर लीवर्स की समग्र शैक्षणिक स्थिति
कुल 52 केयर लीवर्स में से-
- 32 केयर लीवर्स (61.54%) ऐसे थे जिन्होंने किसी न किसी स्तर तक शिक्षा प्राप्त की थी।
- 20 केयर लीवर्स (38.46%) ऐसे थे जिन्होंने कभी भी कोई औपचारिक शिक्षा प्राप्त नहीं की।
यह आंकड़ा अत्यंत चिंताजनक है, क्योंकि आफ्टरकेयर जैसी पुनर्वास व्यवस्था में रहने के बावजूद लगभग 40% केयर लीवर्स पूर्णतः अशिक्षित पाए गए।
2. शिक्षा का स्तर (Level-wise Educational Distribution)
जब इन 52 केयर लीवर्स की शिक्षा को स्तर के अनुसार विश्लेषित किया गया, तो स्थिति और भी गंभीर दिखाई दी-
- 12 केयर लीवर्स (23.08%) ने केवल प्राथमिक स्तर तक शिक्षा प्राप्त की।
- 12 केयर लीवर्स (23.08%) की शिक्षा मिडिल (कक्षा 8 तक) सीमित रही।
- 8 केयर लीवर्स (15.38%) ऐसे थे जो हाईस्कूल स्तर पर अध्ययनरत थे।
- इनमें से केवल 1 केयर लीवर (1.92%) ही कक्षा 10 उत्तीर्ण कर पाया।
यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि प्राथमिक और मिडिल स्तर के बाद शिक्षा की निरंतरता लगभग टूट जाती है, और सेकेंडरी एजुकेशन पूरी कर पाना केयर लीवर्स के लिए अपवाद बन चुका है।
3. दिव्यांग श्रेणी के केयर लीवर्स की स्थिति
कुल 52 केयर लीवर्स में से-
24 केयर लीवर्स (46.15%) दिव्यांग श्रेणी से संबंधित थ, जिनमें दृष्टिबाधित (VI), नेत्रहीन (Blind), श्रवण एवं वाक् बाधित (Hearing and language Impaired-HI) तथा बौद्धिक दिव्यांगता (Intellectual Disability-ID) शामिल थे।
इन 24 दिव्यांग केयर लीवर्स में-
- केवल 9 केयर लीवर्स (37.5%) ने किसी न किसी स्तर की शिक्षा प्राप्त की।
- 15 केयर लीवर्स (62.5%) ऐसे थे जिन्हें किसी भी प्रकार की शिक्षा प्राप्त नहीं हुई।
कुल केयर लीवर्स की संख्या के संदर्भ में-
- शिक्षित दिव्यांग केयर लीवर्स : 17.31%
- अशिक्षित दिव्यांग केयर लीवर्स : 28.85%
- आफ्टरकेयर प्रणाली में रहने के बावजूद बड़ी संख्या में केयर लीवर्स अशिक्षित हैं।
- माध्यमिक शिक्षा (10वीं पास) करने वाले केयर लीवर्स की संख्या लगभग नगण्य है।
- दिव्यांग केयर लीवर्स को दोहरी वंचना का सामना करना पड़ रहा ह।एक ओर केयर लीवर होने के कारण, दूसरी ओर दिव्यांगता के कारण।
- यह स्थिति बाल संरक्षण, पुनर्वास और आफ्टरकेयर नीतियों के क्रियान्वयन में गंभीर खामियों को उजागर करती है।
- केयर लीवर्स के लिए ब्रिज कोर्स और री-एंट्री एजुकेशन सिस्टम विकसित किए जाएं।
- दिव्यांग केयर लीवर्स के लिए समावेशी एवं विशेष शिक्षा सुविधाएँ सुनिश्चित की जाएं।
- आफ्टरकेयर से पूर्व और पश्चात शैक्षणिक मॉनिटरिंग को अनिवार्य बनाया जाए।

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